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श्रीमद् भागवत कथा महायज्ञ का हुआ विश्राम पूर्णाहुति के साथ

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ममता चौहान जिला संवाददाता हरिद्वार उत्तराखंड

 

 

श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का दिव्य संगम—श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ हुआ पूर्णाहुति पर सम्पन्न

प्रेम नगर आश्रम, हरिद्वार | 01 दिसम्बर 2025

पवित्र गंगा तट की आध्यात्मिक ऊर्जा और संत परंपरा के सान्निध्य में स्थित प्रेम नगर आश्रम, हरिद्वार में श्री कृपा फाउंडेशन द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ आज अपनी दिव्य पूर्णाहुति पर भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ । इस पावन कथा का वाचन कथा वाचक विदुषी देवी भवानी जी के द्वारा किया गया, जिनकी अमृतमय वाणी और सरल भाषा ने उपस्थित भक्तजनों को भक्ति, ज्ञान और धर्म के अद्भुत रस से सराबोर कर दिया ।

मुख्य अतिथि एवं विशिष्टजनों की गरिमामयी उपस्थिति

इस पावन अवसर पर अनेक मुख्य अतिथियों तथा मंत्रिमंडल के प्रतिष्ठित सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई । उन्होंने इस ज्ञान यज्ञ को समाज में नैतिक मूल्यों, सांस्कृतिक समृद्धि और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने वाला प्रेरक आयोजन बताया। सभी अतिथियों ने श्री कृपा फाउंडेशन के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है।

भक्ति और आध्यात्मिकता से सराबोर वातावरण

सप्ताह भर कथा स्थल भजन-कीर्तन, संगीत, आध्यात्मिक प्रवचनों और दिव्य अनुष्ठानों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने प्रतिदिन बड़ी संख्या में कथा श्रवण किया और आध्यात्मिक अनुभूति का लाभ उठाया । प्रसंगों का ऐसा भावपूर्ण वर्णन किया जिसने सभी के हृदय में अध्यात्म के प्रति नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार किया ।

कथा के अंतिम दिवस में कथा वाचक विदुषी देवी भवानी जी ने कहा कि “श्रीमद्भागवत जीव को परम शांति, प्रेम, सदाचार और दिव्य मार्ग की ओर ले जाने वाला अनमोल प्रकाश है ।”

इस आयोजन के संचालन में आश्रम के सेवकों, स्थानीय भक्तों, धार्मिक संगठनों और सहयोगी समाजसेवियों का विशेष योगदान रहा। पूरे सप्ताह प्रेम नगर आश्रम भजन-कीर्तन, आध्यात्मिक संगीत और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजता रहा ।

कार्यक्रम के अन्त में महाप्रसाद वितरण किया गया, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और इस दिव्य कथा के आशीष को ग्रहण किया ।

यह सात दिवसीय ज्ञान महोत्सव न केवल भक्तों को आत्मिक शांति दे गया, बल्कि समाज में प्रेम, सद्भाव, सत्य और धर्म की पवित्र भावना को भी सुदृढ़ कर गया।

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